शेअरिंग-केअरिंग - 18 - इन्सानों कि सोच पे लगी जंजिरे

एक बार दुसरी दुनिया से इन्सानों कि दुनिया में आई हुई एक लडकी, इन्सानों कि दुनिया के एक लडके के साथ (जो कि अब उसका अच्छा दोस्त बन गया है) रहती है। जगह छोटी होती है, इसलीये रात को सोने के टाइम पे लडका लडकी को बिस्तर लगा कर देता है, और खुद सोने के लिये कही ओर जगह ढूँढने लगता है।

लडका : तुम यहाँ पर सो जावो।
लडकी : और तुम?
लडका : मैं.. मैं.. (इधर उधर जगह देखकर) मैं वहाँ पर सोता हुं।
लडकी : क्यों? यहाँ पर इतनी जगह तो है ना मेरे बाजू में।
लडका : जगह है, पर मैं वहाँ पर नहीं सो सकता।
लडकी : क्यों?
लडका : क्यों कि हम इन्सानों कि दुनिया में आदमी और औरत साथ में नहीं सोते।
लडकी : क्या? पर क्यों?
लडका : क्यों मतलब...(सोचने लगता है..)
लडकी : मतलब क्या इन्सानों कि दुनिया में कभी भी कोई आदमी और औरत साथ में नहीं सोते?
लडका : नहीं। वैसा नहीं है।
लडकी : फिर?
लडका : सिर्फ शादी होने के बाद ही कोई आदमी किसीं औरत के साथ सोता है।
लडकी : तो क्या तुम्हारी अभी तक शादी नहीं हुई?
लडका : हुई है।
लडकी : फिर तो तुम सो सकते हो ना?
लडका : नहीं। मैं सिर्फ उसी औरत के साथ सो सकता हुं, जिसके साथ मेरी शादी हुई है। या फिर मेरी माँ, बहन या बेटी।
लडकी : पर ऐसा क्यों?
लडका : क्यों कि यहीं यहाँ का नियम है।
लडकी : लेकिन ऐसा नियम क्यों बनाया?
लडका : क्यों?..(सोचते हुये) वो मुझे नहीं पता।
लडकी : क्या तुम्हे मुझसे डर लगता है?
लडका : नहीं, बिलकुल नहीं।
लडकी : मुझे भी तुमसे कोई डर नहीं लगता। क्या तुम्हे मेरे बाजू में सोने में कोई परेशानी होती है?
लडका : नहीं। हम अच्छे दोस्त है, मुझे परेशानी क्यो होगी?
लडकी : मुझे तुम पर पुरा भरोसा है। क्या तुम्हे मुझ पर भरोसा है?
लडका : हा बिलकूल। मुझे भी तुम पर पुरा भरोसा है।
लडकी : फिर अगर एक आदमी और औरत या एक लडका और लडकी दोनों को एक दुसरे पर पुरा भरोसा है, उनको कोई परेशानी भी नहीं है, तो साथ में सोने में दिक्कत क्या है?
लडका : सही बोल रही हो तुम। मैंने इस तरह कभी सोचा ही नहीं।
बस जो चला आ रहा है, उसी को बिना कुछ सोचे समझे ही सही मानकर चल रहा था। अच्छा हुआ आज तुमने मुझे सोचने का एक अच्छा नजरिया दिया। अब मैं समझ गया कि हर एक चीज को सिर्फ बरसों से चली आ रही है, इसलीये सही मानकर नहीं चलना चाहीये, बल्कि खुद उसपर सोचकर फिर सही लगे तो मानना चाहीये।
लडकी : बिलकुल सही। खुद कि अलग सी सोच रखने से तुम्हे खुद का एक अलग नजरिया मिल जाता है। और अगर कोई चीज सही होगी, तो सोच समझकर तुम उसे सही ही पाओगे। और उस वक्त तुम उसको जादा अच्छे से समजकर जी पाओगे। सिर्फ इसलीये नहीं कि किसीं ओर ने बोला है, या पुरखो से चला आ रहा है।
लडका : सही कहा। अब मैं हमेशा कोशिश करुंगा कि खुद के दिमाग से सोचकर, सवाल पुछकर फिर सही लगेगा, तो ही किसीं बात को मानू। तुमने आज मुझे जिने कि एक नई दृष्टी दे दी।

(आज इस दुसरी दुनिया से आई हुई लडकी ने एक सिम्पल सा सवाल पुछ कर इस लडके को इन्सानों कि दुनिया का एक बेतुका नियम तोडकर उसको एक जंजीर से आजाद कर दिया। हम ऐसें कई जंजिरों में बिना वजह खुद को बांधे हुये होते है। कहीं अंधश्रद्धाओं कि जंजिरे हैं, तो कहीं लिंग-जात-धर्म-वर्ण-रंग और अमीर-गरीब जैसे असमानताओं कि। कहीं नीती और सभ्यता के निकष मानकर बनाये गये नियमों कि जंजिरे हैं, तो कहीं खानदानी उसुलों कि जंजिरे है। हम चाहे तो हम खुद को और औरों को भी इन जंजिरों से मुक्त कर सकते है। उसके लिये जरुरत है सिर्फ कुछ सवाल पुछने की। कुछ सवाल खुद से, तो कुछ सवाल इस व्यवस्था से।
*चलो सवाल पुछे, खुद को जंजिरों से मुक्त करें।*

- सचिन (8424041159)
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